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अवध के नायब वज़ीर द्वारा अपनी सूबेदारी का एक बड़ा क्षेत्र ईस्ट इण्डिया कम्पनी को दिये जाने के उपरान्त कम्पनी ने वर्ष 1801 में लेफ्टिनेंट गवर्नर की अध्यक्षता में इस क्षेत्र के प्रशासन हेतु बरेली मुख्यालय पर एक बोर्ड की स्थापना की थी, उस समय एक सेक्रेटरी और कुछ क्लर्क स्वीकृत किये गये थे। कम्पनी के अधिकार में और क्षेत्र बढ़ने पर 1834 में कुछ ही समय के लिये इलाहाबाद को मुख्यालय बनाया गया, परन्तु 1836 में नार्थ वेस्टर्न प्राविन्सेज के सृजन पर मुख्यालय आगरा स्थानांतरित हो गया। जनवरी, 1858 में लार्ड कैंनिग द्वारा शासन का मुख्यालय आगरा से पुनः इलाहाबाद लाया गया और बाद में अवध क्षेत्र को सम्मिलित करते हुये मार्च, 1946 में पूरे सूबे का एक नया नाम यूनाइटेड प्रोविन्सेस ऑफ़ आगरा एंड अवध दिया गया। वह मुख्यालय अब तक सचिवालय का स्वरूप धारण कर चुका था।

राज्य सचिवालय का प्रथम पुनर्गठन वर्ष 1883 में किया गया जिसमें मुख्य सचिव की सहायता के लिये एक वित्त और दूसरे न्याय सचिव की नियुक्तियां की गयी। इसके अतिरिक्त मुख्य अभियंता सिंचाई और मुख्य अभियंता भवन-सड़क , सचिवालय में अपने विभागों में सचिव के रूप में भी कार्य करते थे।

नवीनतम सूचनाये

सचिवालय की ईगवर्नेन्स एवं कम्प्यूटरीकरण योजना के अन्तर्गत निर्धारित नीति के अनुसार 2234 डेस्कटाप कम्प्यूटर्स एवं सहवर्ती उपकरणों की आवश्यकता आंकलित है। उक्त योजना के अंतर्गत वर्ष 2001-02 (प्रथम चरण में) में 83 कम्प्यूटर क्रय कर आवंटित किये गये। तत्पश्चात चरण्बद्ध तरीके से कम्प्यूटरों का क्रय करते हुए आवंटन किया जाता रहा। दसवें चरण तक कुल 2308 कम्प्यूटर क्रय कर आवंटित किेये जा चुके है।

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