अर्हकारी सेवा

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20 वर्ष की आयु के उपरान्त की, सरकार के अधीन मौलिक पद पर की गई सेवा के लिये सरकार के कोष से भुगतानित अवधि अर्हकारी सेवा मानी जाती है। अर्हकारी सेवा के अन्तर्गत सम्पूर्ण सेवा-अवधि जिसमें पूर्ण तथा अर्द्ध औसत वेतन के अवकाश भी सम्मिलित है, अर्हकारी सेवा मानी जाती है। अवैतनिक वेतन की अवकाश की अवधि सक्षम चिकित्सा अधिकारी के चिकित्सा प्रमाण पत्र, उच्च तकनीकी व वैज्ञानिक अध्ययन के लिये स्वीकृत किया गया अवैतनिक अवकाश तथा नागरिक अशांति के फलस्वरूप कार्यालय से अनुपस्थित रहने की दशा में अनुपस्थित अवधि के लिये स्वीकृत किया गया अवैतनिक अवकाश अर्हकारी सेवा मानी जाती है। सेवा मे व्यवधान की अवधि मर्षित मानी जाने पर भी ऐसे व्यवधान की अवधि अर्हकारी सेवा में नहीं जोड़ी जायेगी। सेवा के व्यवधान के मामले सी0एस0आर0 के अनुच्छेद-422 से आच्छादित है तथा यह व्यवधान त्याग पत्र देने, हड़ताल में भाग लेने अथवा सेवा से निकाल देने के कारण न हुआ हो तो स्वतः मर्षित मान ली जायेगी। मर्षित न होने का प्रभाव पूर्व की सेवाओं के व्यपगत होने के रूप में होगा।

सी0एस0आर0 के अनुच्छेद-356 के अनुसार पूर्व की सैन्य सेवा जिस पर पेन्शन प्राप्त न हुई हो तथा इन सेवा के लिये प्राप्त अंशदान राजकोष में जमा कर दिया गया हो, तो वह सेवा भी अर्हकारी सेवा में जोड़ी जायेगी। इसकी पुष्टि सेना अभिलेख कार्यालय से प्राप्त अपेन्डेक्स-‘ए’ में सत्यापन के आधार पर की जायेगी।

यदि किसी शासकीय सेवक ने भारत सरकार में सेवा की और उसके उपरान्त राज्य सरकार में नियुक्त हो जाता है तो ऐसी दशा में भारत सरकार के अधीन प्रदत्त सम्पूर्ण सेवा पेन्शन हेतु अर्हकारी सेवा मानी जायेगी। इस प्रयोजन के लिये अवकाश वेतन, पेन्शनरी अंशदान का विभाजन नहीं होगा तथा सम्पूर्ण दायित्व राज्य सरकार वहन करेगी। अन्य अशासकीय संगठनों, निकायों, निगमों अथवा सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में प्रतिनियुक्ति में नियुक्त रहने पर प्रतिनियुक्ति अवधि का पेन्शनरी अंशदान राजकीय कोष में जमा होने पर ही यह अवधि अर्हकारी सेवा मानी जायेगी।

पेन्शन हेतु निलम्बन अवधि को अर्हकारी सेवा न माने जाने के सम्बन्ध में स्पष्ट आदेश होने पर ही इस अवधि को अनर्ह माना जायेगा अन्यथा यह अर्हकारी सेवा मानी जायेगी।