पारिवारिक पेन्शन

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पारिवारिक पेन्शन की अनुमन्यता हेतु परिवार को निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जायेगा :-

वर्ग-1
  • विधवा/विधुर, आजन्म अथवा पुनर्विवाह, जो भी पहले हो,
  • पुत्र/पुत्री (विधवा पुत्री सहित) को विवाह/पुनर्विवाह अथवा 25 वर्ष की आयु तक अथवा जीविकोपार्जन की तिथि, जो भी पहले हो, तक।
वर्ग-2
  • अविवाहित/विधवा/तलाकशुदा पुत्री, जो वर्ग-1 से आच्छादित नहीं है, को विवाह/पुनर्विवाह तक अथवा जीविकोपार्जन की तिथि मृत्यु की तिथि तक, जो भी पहले हो।
  • ऐसे माता पिता जो सरकारी सेवक पर उसके जीवनकाल में पूर्णतः आश्रित रहे हो तथा मृत सरकारीसेवक ने अपने पीछे कोई विधवा/विधुर अथवा बच्चे नहीं छोड़े है।

आश्रित माता-पिता अविवाहित/तलाकशुदा/विधवा पुत्री की पारिवारिक पेन्शन जीवन पर्यन्त मिलेगी।

वर्ग-2 से आच्छादित अविवाहित/विधवा/तलाकशुदा पुत्री तथा आश्रित माता/पिता की पारिवारिक पेन्शन की अनुमन्यता उसी दशा में होगी जब मृतक के परिवार में पात्र व्यक्ति उपलब्ध नहीं है तथा मृतक सरकारी सेवक के परिवार में ऐसी कोई संतान न हो जो विकलांग हो। पारिवारिक पेन्शन की अनुमन्यता बच्चों में उनकी जन्मतिथि के क्रम में होगी अर्थात् पहले जन्म लिये बच्चे को अनुमन्यता पहले होगी और उसकी पात्रता समाप्त होने के उपरान्त बाद में जन्म लेने वाले बच्चे की पात्रता स्थापित होगी।

उपरोक्त व्यवस्था के अधीन पारिवारिक पेन्शन हेतु आश्रित माने जाने का आधार पारिवारिक पेन्शन की न्यूनतम सीमा राशि तथा उस पर अनुमन्य मँहगाई राहत पर निर्धारित होगी।

संतानहीन विधवा को पारिवारिक पेन्शन का भुगतान उसके पुनर्विवाह के उपरान्त भी किया जायेगा परन्तु शर्त यह है कि यदि विधवा की सभी व्यक्तिगत आय पारिवारिक पेन्शन की न्यूनतम धनराशि की सीमा के बराबर अथवा उससे अधिक हो जाएगी उस दशा में पारिवारिक पेन्शन बन्द हो जाएगी। उक्त प्रकार के प्रकरणों में विधवा को संबंधित कोषागार को प्रत्येक 06 माह पर एक प्रमाण पत्र देना होगा जिसमें उसकी सभी स्रोतों से आय का उल्लेख होगा।

विकलांग संतान को आजीवन, किन्तु पति/पत्नी की मृत्यु के बाद उनकी संतानों को उनकी आयु की वरीयता के क्रम में देय होगी, अर्थात् आयु के अनुसार ज्येष्ठतम् पुत्र/पुत्री को उसके पश्चात् उससे कनिष्ठ इसी क्रम में पारिवारिक पेन्शन अनुमन्य होती रहेंगी। विकलांग संतान यदि वरीयता में पहले आती है तो विकलांग संतान के पहले आयु की वरीयता में आने वाली संतानों को क्रम समाप्त होने पर विकलांग पुत्र/पुत्री को पेन्शन अनुमन्य होगी।

(4) मृतक शासकीय सेवक के ऊपर पूर्ण रूप से आश्रित ऐसे माता/पिता जिनकी आय रू0 2550/- से कम हो ।

(5) यदि उत्तरजीवी दो पत्नियाँ है तो वरिष्ठ अर्थात् जिसका विवाह पहले हुआ हो, को पहले क्रम से पारिवारिक पेन्शन स्वीकृत होगी, बाद में दूसरी पत्नी को।

(6) मानसिक रूप से विकलांग पुत्र/पुत्री तथा अवयस्क पुत्र/पुत्री को पारिवारिक पेन्शन का भुगतान विविध संरक्षक के माध्यम् से किया जायेगा।

पारिवारिक पेन्शन की पात्रता :-
पारिवारिक पेन्शन हेतु अर्हकारी सेवा की कोई बाध्यता नहीं है। छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों के फलस्वरूप पारिवारिक पेन्शन सम्बन्धित शासकीय सेवक द्वारा अन्तिम आहरित वेतन (वेतन का तात्पर्य मूल नियम-9 (21)(1) में परिभाषित वेतन से है) का 30 प्रतिशत किन्तु न्यूनतम रू0 3500/- से कम नहीं होगी।
सेवानिवृत्ति की दशा में पारिवारिक पेन्शन कर्मचारी की 65 वर्ष की आयु या 5 वर्ष तक दोगुनी दर से किन्तु पेन्शन से अधिक नहीं तत्पश्चात् 30 प्रतिशत सामान्य दर से देय होती है।
मृत्यु की दशा में कर्मचारी की सेवा यदि 7 वर्ष से कम की है, तो उसे दोगुनी दर से (अर्थात् अन्तिम आहरित वेतन का 50 प्रतिशत) अनुमन्य नहीं होगी। उसे सामान्य दर (अर्थात् अन्तिम आहरित वेतन का 30 प्रतिशत) न्यूनतम पेन्शन ही अनुमन्य होगी, किन्तु यदि सरकारी सेवक ने 7 वर्ष से अधिक की सेवा पूर्ण कर ली है तो उसे मृत्यु के अगले दिनांक से 10 वर्ष तक दोगुनी दर किन्तु यह ध्यान रहें कि उसकी आयु 65 वर्ष से अधिक की न हो तत्पश्चात् समान्य दर से पारिवारिक पेन्शन अनुमन्य होती है।

3- मृत्यु उपादान:- मृत्यु उपादान की पात्रता कर्मचारी द्वारा इस हेतु नामांकन के आधार पर होगी। नामांकन के अभाव में पात्रता के लिये परिवार को दो श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी के परिवार के सदस्यों में उपादान की धनराशि बराबर-बराबर देय होगी। यदि इस श्रेणी का कोई सदस्य नहीं है, तो दूसरी श्रेणी के परिवार के सदस्यों में इसे बराबर-बराबर बांटा जायेगा। यदि नामांकन नहीं है और परिवार में कोई सदस्य नहीं है तो मृत्यु उपादान शासन के पक्ष में व्यपगत हो जायेगी।

परिवार की प्रथम श्रेणी:- पति या पत्नी, पुत्र एवं अविवाहित पुत्रियाँ (सौतेली एवं गोद ली हुई संतानें भी सम्मिलित होंगी)

परिवार की द्वितीय श्रेणी:- विवाहित एवं विधवा पुत्रियाँ, 18 वर्ष से कम आयु के भाई, अविवाहित बहने, माता/पिता तथा पूर्व मृत पुत्र की संताने।

मृत्त्यु उपादान की दरें निम्न प्रकार से है:- (पारिवारिक पेन्शन की भाँति मृत्यु उपादान में भी अर्हकारी सेवा की कोई बाध्यता नहीं है)

सेवा अवधि   मृत्यु उपादान की दर
एक वर्ष से कम की सेवा
एक वर्ष से अधिक किन्तु 5 वर्ष
से कम की सेवा
 5 वर्ष अथवा उससे अधिक किन्तु
20 वर्ष से कम की सेवा
20 वर्ष या उससे अधिक की सेवा    
परिलब्धियों का दोगुना
परिलब्धियों का छः गुना
परिलब्धियों का 12 गुना
अर्हकारी सेवा की प्रत्येक पूर्ण छमाही अवधि के लिये परिलब्धियों के 1/2 के बराबर होगी, जिसकी अधिकतम् सीमा अन्तिम आहरित परिलब्धियों के 33 गुने के बराबर अथवा रू0 10,00,000/- जो भी कम हो से अधिक नहीं होगी।

परिलब्धियों का तात्पर्य:- मूल नियम 9 (21)(1) के अन्तर्गत परिभाषित वेतन अर्थात् मूल वेतन ग्रेड वेतन तथा मृत्यु के दिनांक को प्राप्त मँहगाई भत्ते के योग को सम्मिलित करते हुये है।

अतिरिक्त पेन्शन/पारिवारिक पेन्शन:- पेन्शनरों/पारिवारिक पेन्शनरों की पेन्शन/पारिवारिक पेन्शन की धनराशि में निम्न प्रकार से पेन्शन/पारिवारिक पेन्शन अनुमन्य होगी।

पेन्शन/पारिवारिक पेन्शनर की आयुपेन्शन/पारिवारिक पेन्शनर की अतिरिक्त धनराशि
80 वर्ष परन्तु 85 वर्ष से कम मूल पेन्शन/पारिवारिक पेन्शन का 20 प्रतिशत प्रतिमाह
85 वर्ष परन्तु 90 वर्ष से कम मूल पेन्शन/पारिवारिक पेन्शन का 30 प्रतिशत प्रतिमाह
90 वर्ष परन्तु 95 वर्ष से कम मूल पेन्शन/पारिवारिक पेन्शन का 40 प्रतिशत प्रतिमाह
95 वर्ष परन्तु 100 वर्ष से कम मूल पेन्शन/पारिवारिक पेन्शन का 50 प्रतिशत प्रतिमाह
100 वर्ष या उससे अधिक मूल पेन्शन/पारिवारिक पेन्शन का 100 प्रतिशत प्रतिमाह